कवच ट्रायल पूरा होते ही गतिमान, वंदे भारत, शताब्दी की रफ्तार बहाल करने का प्रस्ताव

दिल्ली से आगरा, भोपाल और खजुराहो की तरफ सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। हज़रत निज़ामुद्दीन-पलवल सेक्शन पर भारत की स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इसके बाद दिल्ली डिवीजन ने कई प्रीमियम ट्रेनों की रफ्तार पहले जैसी बहाल करने और कुछ और ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने का प्रस्ताव उत्तर रेलवे मुख्यालय को भेजा है।

क्यों धीमी हुई थी रफ्तार?

कवच सिस्टम को कमीशन करने के लिए हज़रत निज़ामुद्दीन-पलवल सेक्शन में कुछ समय के लिए ट्रेनों की रफ्तार अस्थायी तौर पर घटाकर 130 किमी प्रति घंटा कर दी गई थी। ट्रायल पूरा होने के बाद भी ये ट्रेनें अब तक इसी घटी हुई रफ्तार से चल रही थीं।

इन ट्रेनों की रफ्तार बहाल करने का प्रस्ताव

अब जब इस सेक्शन में कवच का ट्रायल पूरी तरह सफल हो चुका है, दिल्ली डिवीजन ने इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार (एमपीएस) पहले जैसी बहाल करने का अनुरोध किया है:

ट्रेनरूटप्रस्तावित रफ्तार
12049/12050हज़रत निज़ामुद्दीन-झांसी-हज़रत निज़ामुद्दीन गतिमान एक्सप्रेस160 किमी/घंटा
20171/20172रानी कमलापति-हज़रत निज़ामुद्दीन-रानी कमलापति वंदे भारत एक्सप्रेस160 किमी/घंटा
22469/22470खजुराहो-हज़रत निज़ामुद्दीन-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस160 किमी/घंटा
12001/12002नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस150 किमी/घंटा

इन ट्रेनों की स्पीड और बढ़ाने का सुझाव

इसके अलावा दिल्ली डिवीजन ने यह भी सुझाव दिया है कि निम्न ट्रेनों की रफ्तार भी 160 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाने पर विचार किया जाए, या फिर जो भी रफ्तार सक्षम अधिकारी उचित समझें:

ट्रेनरूट
12264हज़रत निज़ामुद्दीन-पुणे डुरंटो एक्सप्रेस
22414हज़रत निज़ामुद्दीन-मडगांव राजधानी एक्सप्रेस
12432हज़रत निज़ामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम राजधानी एक्सप्रेस
12951/12952नई दिल्ली-मुंबई सेंट्रल तेजस राजधानी एक्सप्रेस
12953/12954हज़रत निज़ामुद्दीन-मुंबई सेंट्रल तेजस राजधानी एक्सप्रेस

दिल्ली डिवीजन के मुताबिक, इन ट्रेनों की रफ्तार बहाल और बढ़ाए जाने से सफर का समय कम होगा, परिचालन दक्षता बेहतर होगी और ट्रेनों की समयपालन (पंक्चुअलिटी) में भी सुधार आएगा।

आगे क्या?

यह अभी दिल्ली डिवीजन की तरफ से भेजा गया प्रस्ताव है, जिस पर उत्तर रेलवे मुख्यालय को अंतिम फैसला लेना है। कवच ट्रायल पूरा होना एक तय तथ्य है, लेकिन इन ट्रेनों की रफ्तार कब और किस स्तर तक बढ़ेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जैसे ही इस पर मंजूरी मिलती है, RailJournal आपको सबसे पहले बताएगा।